जीते हुए भी मरने का ख्वाब आया
जीते हुए भी मरने का ख्वाब आया
कौन ही इस जीवन की मोह माया से बच पाया
मरने से पहले ही नर्क स्वर्ग का भेद करते
रोज़ इस भूलभुलैया में लड़ते मरते
सर के उप्पर की छत
ये घर ये खाना का ना करते ध्यान
सूरज ना बदला ना बदला ये चाँद
कितना बदल गया इंसान
कितना बदल गया इंसान
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Aditi Rai is a budding poet with a talent for expressing her thoughts through verses. She began writing poetry in the 7th grade and has been crafting pieces for over a year. Inspired by the world around her, Aditi finds joy in poetry and aims to connect with people of all ages through her words.