इंसान

इंसान

जीते हुए भी मरने का ख्वाब आया
जीते हुए भी मरने का ख्वाब आया

कौन ही इस जीवन की मोह माया से बच पाया
मरने से पहले ही नर्क स्वर्ग का भेद करते
रोज़ इस भूलभुलैया में लड़ते मरते

सर के उप्पर की छत
ये घर ये खाना का ना करते ध्यान

सूरज ना बदला ना बदला ये चाँद
कितना बदल गया इंसान
कितना बदल गया इंसान

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