इंसान

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जीते हुए भी मरने का ख्वाब आयाजीते हुए भी मरने का ख्वाब आया कौन ही इस जीवन की मोह माया से बच पायामरने से पहले ही नर्क स्वर्ग का भेद करतेरोज़ इस भूलभुलैया में लड़ते…
Aditi Rai
Aditi Rai
February 18, 2025 · 1 Min Read

जीते हुए भी मरने का ख्वाब आया
जीते हुए भी मरने का ख्वाब आया

कौन ही इस जीवन की मोह माया से बच पाया
मरने से पहले ही नर्क स्वर्ग का भेद करते
रोज़ इस भूलभुलैया में लड़ते मरते

सर के उप्पर की छत
ये घर ये खाना का ना करते ध्यान

सूरज ना बदला ना बदला ये चाँद
कितना बदल गया इंसान
कितना बदल गया इंसान

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Aditi Rai
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Aditi Rai

Aditi is just a teenager - exploring real world with words.

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